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*॥ सुखमय जीवन का सूत्र ॥*
-------------------------------- *परिवार को बल से नहीं, प्रेम से ही जीता जा सकता है। अपनों को हराकर आप कभी नहीं जीत सकते अपितु अपनों से हारकर ही आप उन्हें जीत सकते हैं*। *जो टूटे को बनाना और रूठे को मनाना जानता है, वही तो बुद्धिमान है*।
वर्तमान समय में परिवारों की जो स्थिति हो गयी है वह अवश्य चिन्तनीय है। घर - *परिवार में आज सुनाने को सब तैयार हैं पर सुनने को कोई तैयार ही नहीं। रिश्तों की मजबूती के लिये हमें सुनाने की ही नहीं अपितु सुनने की आदत भी डालनी पड़ेगी*।
*अपने को सही साबित करने के चक्कर में पूरे परिवार को ही अशांत बनाकर रख देना कदापि उचित नहीं। माना कि आप सही हैं पर कभी - कभी परिवारिक शान्ति बनाये रखने के लिये बेवजह सुन लेना भी कोई अपराध नहीं*। जिन्दगी की खूबसूरती केवल ये नहीं कि आप कितने खुश हैं, अपितु ये है कि आपसे कितने खुश हैं।
Dr Sudhir Khetawat m.no 9425937210 🌹*
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